Hindi कहानी
कहानी वो आया मेरा मन कुछ भरमाया इससे पहले कि मै कुछ सोचती अपने मन को टटोलती या कुछ सपने बुनती अचानक पाया कि वो तो था सिर्फ एक साया. सालों बीते जिन्दगी ने एक दिन फिर सामने ला खड़ा किया मैने हैरानी से पलकें झपकाईं तो उसे उसके जीवन साथी के संग पाया, और वो? कुछ नया नया सा... हालांकि पुरुष था, फिर भी कुछ शर्माता सा पेश आया. मैं अचानक नींद से जागी सब उमीदें जैसे पर लगा कर भागीं और मैं जिन्दी के पथरीले धरातल पर आ खड़ी हुई. तो अब? अब आगे बदना होगा खुद ही खुद को संभाल कर नई राहें तलाश करने को चलना होगा. मैं चलती रही कुछ राहें बनती रहीं, कुछ मैं बनाती रही वो भी चलता रहा पुरुष था ना, उसके लिये राहें आसानी से खुलती रहीं सालों पर सालों की परतें जमती रहीं. एक दिन फिर मिले वो ही पुरानी बातें.....पुराने शिकवे गिले मेरे सपनों की रानी थीं तुम क्यों तब कुछ नहीं बोलीं थीं तुम? आज भी तुम्हें पूजता हूँ. काश...तुम्हारा हाथ थाम कर चला होता तो सफ़र कुछ अलग अंदाज में ढला होता. मैं फिर हैरान परेशान...... वापिस मन की गहराईयों में ...