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Hindi कहानी

कहानी वो आया मेरा मन कुछ भरमाया इससे पहले कि मै कुछ सोचती अपने मन को टटोलती या कुछ सपने बुनती अचानक पाया कि वो तो था सिर्फ एक साया. सालों बीते जिन्दगी ने एक दिन फिर सामने ला खड़ा किया मैने हैरानी से पलकें झपकाईं तो उसे उसके जीवन साथी के संग पाया, और वो? कुछ नया नया सा... हालांकि पुरुष था, फिर भी कुछ शर्माता सा पेश आया. मैं अचानक नींद से जागी सब उमीदें जैसे पर लगा कर भागीं और मैं जिन्दी के पथरीले धरातल पर आ खड़ी हुई. तो अब? अब आगे बदना होगा खुद ही खुद को संभाल कर नई राहें तलाश करने को चलना होगा. मैं चलती रही कुछ राहें बनती रहीं, कुछ मैं बनाती रही वो भी चलता रहा पुरुष था ना, उसके लिये राहें आसानी से खुलती रहीं सालों पर सालों की परतें जमती रहीं. एक दिन फिर मिले वो ही पुरानी बातें.....पुराने शिकवे गिले मेरे सपनों की रानी थीं तुम क्यों तब कुछ नहीं बोलीं थीं तुम? आज भी तुम्हें पूजता हूँ. काश...तुम्हारा हाथ थाम कर चला होता तो सफ़र कुछ अलग अंदाज में ढला होता. मैं फिर हैरान परेशान...... वापिस मन की गहराईयों में ...

प्रेम म्हणजे काय ….!!!

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प्रेम म्हणजे काय ….!!! प्रेम…. दोन देह एक श्वास … प्रेम…. मनातील नाजूक कळी  प्रेम…. सुवासिक सुंदर फुल प्रेम…. हृदयातील निशब्द भावना प्रेम…. तिची आकस्मित नजर प्रेम…. आठवण तिच्या स्मित हास्याची प्रेम…. पहाटेचे सोनेरी स्वप्न .                          प्रेम…. किनार्यावरील बेधुंद वारा प्रेम…. सागरी लाट किनार्याची तिला आस प्रेम…. हळुवार जपणारा फुलपाखरू प्रेम…. ती नसताना जवळ असल्याचा भास प्रेम…. तिचा निरागस स्पर्श.                            प्रेम…. ओठावरील अबोल भावना प्रेम…. जणू अप्सरेची एक झलक प्रेम…. तिच्या चेहर्यावरील कोहिनूरची चमक प्रेम…. तिला रोज पाहण्याची ओढ प्रेम…. पौर्णिमेच्या चंद्राचा शीतल प्रकाश प्रेम…. शांत मनातील सुखद स्वर प्रेम…. हृदयाचा न चुकणार ठोका प्रेम…. वर्तमानात घडणारा इतिहास प्रेम…. मनाचे माणशी नाते प्रेम…. आनंदाचा सुखद सहवास प्रेम…. ...